मुरुंगई कीराई कुझाम्बु | सहजन के पत्तों की करी

Inbarasi — South Indian food creator
InbarasiVerified Creator

Authentic South Indian Food Creator · Home Chef

Prep
15 मिनट
Cook
25 मिनट
Total
40 मिनट
Serves
4
Difficulty
easy
Calories
7670 kcal
Veg medium curry South Indian
मुरुंगई कीराई कुझाम्बु | सहजन के पत्तों की करी

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मुरुंगई कीरई कुझाम्बू दक्षिण भारतीय व्यंजनों की एक लोकप्रिय पारंपरिक करी है, जिसे ताज़ी सहजन की पत्तियों को खट्टी इमली की चटनी, अरहर दाल और गरम मसालों के साथ धीमी आंच पर पकाकर बनाया जाता है। तमिल में इसे मुरुंगईकीरई कुझाम्बू के नाम से जाना जाता है। तमिलनाडु के घरों में सहजन के पेड़ बहुतायत में उगते हैं और उनकी ताज़ी पत्तियों को तोड़कर पौष्टिक और स्वादिष्ट रोज़ाना का भोजन बनाया जाता है, जो पीढ़ियों से तमिल परिवारों में चला आ रहा है। तमिल परिवार इस कुझाम्बू को इसके तीखे, मिट्टी जैसे स्वाद और इसके कई स्वास्थ्य लाभों के कारण बहुत पसंद करते हैं। यह सप्ताह के दिनों में दोपहर के भोजन का एक मुख्य व्यंजन है, जिसे अक्सर परिवार के साथ सादे दिनों में बनाया जाता है और गरमागरम चावल और घी के साथ प्यार से परोसा जाता है। क्योंकि सहजन की पत्तियों को पारंपरिक सिद्ध चिकित्सा में सुपरफूड माना जाता है, इसलिए कई दादी-नानी इसे सप्ताह में कम से कम एक बार ज़रूर बनाती हैं। प्रसव के बाद स्वास्थ्य लाभ के दौरान भी इसे अक्सर बनाया जाता है और छोटे बच्चों और परिवार के बुजुर्ग सदस्यों को ताकत और आयरन की मात्रा बढ़ाने के लिए खिलाया जाता है। इस रेसिपी की खासियत यह है कि इसे घर में आसानी से उपलब्ध सामग्री का उपयोग करके बनाया जा सकता है। बेहतरीन मुरुंगई कीरई कुझाम्बू बनाने का राज है ताज़ी तोड़ी हुई कोमल सहजन की पत्तियों का इस्तेमाल करना और इमली व मसालों को धीमी आंच पर पकने देना ताकि हर स्वाद आपस में अच्छी तरह घुलमिल जाए। कीरई को हमेशा सबसे आखिर में डालें ताकि उसका चटख रंग और पोषक तत्व बरकरार रहें। इसे गरमा गरम चावल, अप्पलम और थोड़े से घी के साथ परोसें, यह एक बेहद स्वादिष्ट तमिल भोजन बनेगा।

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सामग्री(19 items)

Ingredients checklist for मुरुंगई कीराई कुझाम्बु | सहजन के पत्तों की करी
Yields 4 servings·South Indian Cuisine·Vegetarian

विधि

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टिप्स और ट्रिक्स

  • सहजन की पत्तियों को हमेशा खाना पकाते समय बिल्कुल अंत में डालें और 3 से 4 मिनट से अधिक न पकाएँ। सहजन की पत्तियों को ज़्यादा पकाने से वे पीली पड़ जाती हैं, उनके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और कुझाम्बू का स्वाद कड़वा हो जाता है।
  • कुझाम्बू बनाने का पारंपरिक तमिल तरीका है कि इसमें सामान्य खाना पकाने के तेल की जगह तिल का तेल (नल्लेन्नई) इस्तेमाल किया जाए। तिल का तेल एक खास तरह की खुशबू देता है जो सहजन के पत्तों की मिट्टी जैसी महक और इमली के तीखेपन को बखूबी निखारता है।
  • गाढ़ापन और मलाईदारपन बढ़ाने के लिए, इमली के रस के साथ नारियल का एक छोटा टुकड़ा पीसकर चिकना पेस्ट बना लें। इससे कुझाम्बू को दक्षिण तमिलनाडु शैली का एक समृद्ध स्वाद मिलता है, जो चावल के साथ बेहद स्वादिष्ट लगता है।

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