पिरनदाई कुलम्बु | एडमैंट क्रीपर ग्रेवी


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पिरांडाई कुलंबू तमिलनाडु की एक पारंपरिक ग्रेवी है, जिसे पिरांडाई (जिसे वनस्पति विज्ञान में सिस्सस क्वाड्रैंगुलरिस भी कहा जाता है) से बनाया जाता है। इमली से बनी यह खट्टी-मीठी ग्रेवी पीढ़ियों से तमिल घरों का मुख्य भोजन रही है और दक्षिण भारत की समृद्ध पाक परंपरा से गहराई से जुड़ी हुई है। पिरांडाई का पौधा अपने विशिष्ट स्वाद और हल्के कसैलेपन के लिए जाना जाता है, जो सुगंधित मसालों, इमली और नारियल के साथ मिलकर एक बेहद स्वादिष्ट ग्रेवी बनाता है, जिसका स्वाद गरमागरम चावल और तिल के तेल के साथ लाजवाब लगता है। तमिल परिवार पिरांडाई कुलंबू को न केवल इसके तीखे और अनोखे स्वाद के लिए, बल्कि इसके उल्लेखनीय स्वास्थ्य लाभों के लिए भी हमेशा से पसंद करते आए हैं। ऐसा माना जाता है कि यह हड्डियों को स्वस्थ रखने, पाचन में सहायता करने और जोड़ों को मजबूत बनाने में सहायक है, यही कारण है कि तमिलनाडु भर की दादी-नानी हर उम्र के परिवार के सदस्यों के लिए इसे प्रेमपूर्वक बनाती आई हैं। यह विशेष रूप से सप्ताह के दिनों में घर पर दोपहर के भोजन के दौरान लोकप्रिय है और अक्सर ठंडे महीनों में बनाई जाती है, जब पिरांडाई स्थानीय बाजारों और घरेलू बगीचों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होती है। कई परिवार इस व्यंजन को अम्मा की रसोई के आरामदायक और गर्माहट भरे माहौल से जोड़ते हैं। पिरांडाई कुलंबू की असली खासियत है ताज़ा पिसे हुए नारियल मसाले का इमली की खटास और भुने मसालों की मिट्टी जैसी खुशबू का मेल। सबसे अच्छा स्वाद पाने के लिए कच्चे पिरांडाई को हमेशा दस्तानों से ही छूना चाहिए, क्योंकि इससे त्वचा में जलन और खुजली हो सकती है। पिरांडाई के साफ किए हुए टुकड़ों को ग्रेवी में डालने से पहले हल्का सा तलने से खुजली कम होती है और स्वाद भी बढ़ जाता है। असली तमिल स्वाद के लिए तिल का तेल इस्तेमाल करें, जो इस व्यंजन को एक नया ही स्तर पर ले जाता है।
सामग्री
विधि
💡 Tap a step to mark it doneकच्ची पिरांडाई को छूने से पहले दस्ताने पहनें। पिरांडाई के डंठल की बाहरी परत को सावधानीपूर्वक छीलें और उन्हें 1 इंच के छोटे टुकड़ों में काट लें। टुकड़ों को बहते पानी के नीचे अच्छी तरह धो लें और सुखा लें।
एक पैन में मध्यम आंच पर 1 बड़ा चम्मच तिल का तेल गरम करें। साफ किए हुए पिरांडाई के टुकड़े डालें और उन्हें 4 से 5 मिनट तक हल्का भूनें, जब तक कि वे थोड़े नरम न हो जाएं और उनका रंग बदल जाए। यह प्रक्रिया पिरांडाई की खुजली पैदा करने वाली प्रकृति को बेअसर करने में मदद करती है। इसे अलग रख दें।
इमली को 1 कप गुनगुने पानी में 10 मिनट के लिए भिगो दें। इमली का रस अच्छी तरह से निकाल लें, गूदा और बीज अलग कर दें। इमली का पानी तैयार रखें।
एक छोटे ब्लेंडर में, ताज़ा कसा हुआ नारियल, काली मिर्च और जीरा को थोड़े से पानी के साथ पीसकर एक चिकना पेस्ट बना लें। इस नारियल मसाला पेस्ट को अलग रख दें।
बचे हुए 2 बड़े चम्मच तिल के तेल को एक गहरे कढ़ाई या पैन में गरम करें। इसमें सरसों के दाने डालें और उन्हें चटकने दें। फिर जीरा, सूखी लाल मिर्च और करी पत्ते डालें। इन्हें 30 सेकंड तक चटकने दें।
पैन में कटी हुई प्याज और लहसुन की कलियाँ डालें। मध्यम आंच पर 5 से 6 मिनट तक भूनें जब तक कि प्याज सुनहरे भूरे रंग की न हो जाए और लहसुन की कच्ची गंध पूरी तरह से गायब न हो जाए।
पैन में कटे हुए टमाटर डालें और बीच-बीच में चलाते हुए 4 से 5 मिनट तक पकाएं, जब तक कि टमाटर नरम और गल न जाएं और तेल मिश्रण से अलग होने लगे।
पैन में हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और धनिया पाउडर डालें। अच्छी तरह मिलाएँ और मध्यम आँच पर 2 मिनट तक पकाएँ ताकि मसालों की कच्ची महक दूर हो जाए।
इमली का पानी डालें और एक कप सादा पानी भी मिलाएँ। सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाएँ। स्वादानुसार नमक और खट्टापन कम करने के लिए गुड़ का एक छोटा टुकड़ा डालें। ग्रेवी को धीमी आँच पर उबलने दें।
उबलती इमली की ग्रेवी में भुने हुए पिरांडाई के टुकड़े डालें। अच्छी तरह मिलाएँ और मध्यम आँच पर 8 से 10 मिनट तक पकाएँ ताकि पिरांडाई सभी स्वादों को सोख ले और ग्रेवी थोड़ी गाढ़ी हो जाए।
कुलंबू में पिसा हुआ नारियल मसाला पेस्ट डालें। अच्छी तरह मिलाएँ। कुलंबू को धीमी आँच पर 5 मिनट तक उबलने दें, जब तक कि यह गाढ़ा न हो जाए और तेल ऊपर तैरने लगे।
नमक और मसालों का स्वाद चख लें। ज़रूरत पड़ने पर मात्रा समायोजित करें। आँच बंद कर दें और कुछ ताज़े करी पत्तों से सजाएँ। गरमागरम चावल और थोड़ा सा तिल का तेल डालकर परोसें, ताकि आपको असली तमिल व्यंजन का अनुभव मिल सके।
टिप्स और ट्रिक्स
- कच्ची पिरांडाई मछली को छीलते और काटते समय हमेशा दस्ताने पहनें या कपड़े का इस्तेमाल करें, क्योंकि इससे खुली त्वचा पर गंभीर खुजली और जलन हो सकती है। ग्रेवी में डालने से पहले पिरांडाई के टुकड़ों को तेल में भूनने से यह समस्या काफी हद तक कम हो जाती है।
- इस कुलंबू के लिए सामान्य खाना पकाने के तेल की जगह तिल का तेल इस्तेमाल करें। इससे दक्षिण भारतीय व्यंजनों की असली खुशबू और स्वाद आता है, जो इमली की खटास और मसालों की मिट्टी जैसी महक के साथ पूरी तरह मेल खाता है।
- कुलंबू में गुड़ का एक छोटा टुकड़ा डालने से इमली की खटास संतुलित हो जाती है और सभी स्वाद आपस में खूबसूरती से मिल जाते हैं। इस चरण को न छोड़ें, क्योंकि यह एक संपूर्ण तमिल नुस्खा है जिससे कुलंबू का स्वाद पूरी तरह संतुलित हो जाता है।
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