प्याज़ का बोंडा रेसिपी


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प्याज़ का बोंडा दक्षिण भारतीय रसोई का एक बेहद प्रिय तला हुआ नाश्ता है जो तमिल खाने में विशेष स्थान रखता है। मसालेदार बेसन के घोल में कुरकुरी प्याज़ डालकर बनाया जाने वाला यह नाश्ता बाहर से सुनहरा और कुरकुरा, अंदर से नरम होता है। तमिलनाडु की गलियों और घरों से शुरू हुआ यह बोंडा पीढ़ियों से चाय के समय का पसंदीदा नाश्ता रहा है। इसकी सादी सामग्री और तीखा स्वाद इसे दक्षिण भारतीय आरामदेह खाने का असली प्रतीक बनाता है।
तमिल परिवारों को प्याज़ के बोंडे बेहद पसंद हैं, और बारिश की शाम नारियल की चटनी और चाय या फिल्टर कॉफी के साथ गर्म बोंडे खाए बिना अधूरी लगती है। त्योहारों, स्कूल की छुट्टियों और सप्ताहांत पर परिवार के साथ रसोई में जब सब मिलते हैं तब यह नाश्ता बनता है। कार्तिकाई दीपम, दिवाली, और मंदिर के प्रसाद के मौकों पर भी इस तले हुए नाश्ते को बड़े उत्साह और प्रेम से बनाया जाता है।
इस रेसिपी को खास बनाती है कि यह हर तमिल घर में मौजूद आम सामग्री से जल्दी और आसानी से बन जाती है। परफेक्ट बोंडे का राज़ घोल की गाढ़ापन में निहित है — यह इतना गाढ़ा हो कि चम्मच की पीठ पर चिपके पर भारी न हो। सही तापमान पर तेल में तलने से बोंडा सुनहरा और कुरकुरा बनता है बिना अतिरिक्त तेल सोखे। घोल में गर्म तेल की बूंद डालने से यह हल्का और कुरकुरा बनता है। ये सब टिप्स अपनाकर आप घर पर हर बार बेहतरीन बोंडा बना सकते हैं।
सामग्री
विधि
💡 Tap a step to mark it doneएक बड़े कटोरे में बेसन और चावल का आटा लीजिए। चावल का आटा बोंडे को बाहर से ज़्यादा कुरकुरा बनाता है इसलिए इसे न छोड़ें। दोनों आटे को चम्मच से अच्छी तरह मिलाइए।
अब लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, हींग, बेकिंग सोडा और नमक डालिए। सभी सूखी चीज़ों को अच्छी तरह मिलाइए ताकि मसाले पूरे घोल में समान रूप से फैल जाएं।
कटी हुई प्याज़, हरी मिर्च, कसी हुई अदरक, करी पत्ते और धनिया पत्ती कटोरे में डालिए। ये सब चीज़ें बोंडे को उसका खास स्वाद देती हैं इसलिए सब कुछ बारीक़ कटा हुआ होना चाहिए।
धीरे-धीरे पानी डालकर सब कुछ अच्छी तरह मिलाइए। घोल गाढ़ा होना चाहिए और अपना आकार बनाए रख सके। यह चम्मच की पीठ पर अच्छी तरह चिपके। एक बार में बहुत सारा पानी न डालें।
एक गहरी कढ़ाई या भारी तले की कढ़ाई में तेल गर्म कीजिए। तेल तैयार है या नहीं पता करने के लिए थोड़ा घोल तेल में डालिए। अगर वह कुछ सेकंड में तेल की सतह पर आ जाए तो तेल सही तापमान पर है। आदर्श तापमान 170 से 180 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए।
तलना शुरू करने से पहले कढ़ाई से एक बड़ा चम्मच गर्म तेल निकालकर घोल में मिलाइए और अच्छी तरह फेंटिए। यह तरकीब़ बोंडे को हल्का और कुरकुरा बनाती है क्योंकि इससे तलते समय घोल में छोटे-छोटे हवा के बुलबुले बनते हैं।
अपनी उंगलियों को थोड़ा पानी से भिगोइए। एक बड़ा चम्मच घोल निकालकर धीरे से गर्म तेल में डालिए। इसे गोल बनाने की कोशिश कीजिए पर परफेक्ट होना ज़रूरी नहीं है — घर पर बने बोंडे का अलग ही आकर्षण होता है।
एक बार में 4-5 बोंडे ही तलिए। कढ़ाई में भीड़ न लगाइए वरना तेल का तापमान कम हो जाएगा और बोंडे तेल सोख लेंगे। मध्यम आँच पर तलते रहिए।
बोंडे को घुमाते हुए तलिए ताकि सब तरफ से सुनहरे रंग का हो जाए। यह 3 से 4 मिनट में हो जाता है। जब गहरे सुनहरे और कुरकुरे हो जाएं तो छलनी वाले चम्मच से निकाल लीजिए।
तले हुए बोंडे को पेपर टॉवल पर रखिए ताकि अतिरिक्त तेल सोख लिया जाए। गर्म-गर्म नारियल की चटनी, टमाटर की चटनी या हरी पुदीने की चटनी के साथ चाय या दक्षिण भारतीय फिल्टर कॉफी लगाकर परोसिए।
टिप्स और ट्रिक्स
- तलते समय तेल को हमेशा मध्यम आँच पर रखिए। अगर तेल बहुत गर्म है तो बोंडा बाहर से जल जाएगा पर अंदर से कच्चा रह जाएगा। अगर तेल ठंडा है तो बहुत तेल सोखकर नरम हो जाएगा। मध्यम आँच बोंडे को बिल्कुल सुनहरा और कुरकुरा बनाता है।
- बेसन में चावल का आटा मिलाना बोंडे को कुरकुरा बनाने का राज़ है। अगर और भी ज़्यादा कुरकुरापन चाहिए तो एक बड़ा चम्मच मकई का आटा भी मिला सकते हैं। गर्म तेल की बूंद डालने की तरकीब़ को कभी न भूलें — यह बोंडे को अंदर से फूला और हल्का बनाती है।
- घोल में अधिक पानी न डालिए। घोल गाढ़ा और सघन होना चाहिए ताकि तेल में डालने पर बिखरे नहीं। अगर प्याज़ निकलते समय पानी छोड़ती है तो हो सकता है ज़्यादा पानी की ज़रूरत न पड़े। तलने से पहले कच्चे घोल का स्वाद जाँच लीजिए और नमक व मसाला आवश्यकतानुसार बढ़ा दीजिए।
Nutrition Info (per serving)
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